About banswara बांसवाड़ा जिला दर्शन -Banswara District Darshan
बांसवाड़ा का नामकरण →
बांसवाड़ा नाम पड़ने के दो कारण माने जाते है :
बांस के जंगलों की अधिकता के कारण।
बांसवाड़ा के संस्थापक जगमाल ने
बासना नामक भील को मारकर इसकी स्थापना की अत: इसे बाँसवाड़ा नाम दिया।
बाँसवाड़ा रियासत का राजस्थान में एकीकरण, द्वितीय चरण (24/25 मार्च 1948 ) में हुआ।
बाँसवाड़ा के चन्द्रवीर सिंह ने विलय-पत्र
(एकीकरण हेतु) पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि ”
मैं अपने डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर रहा हूँ।”
बांसवाड़ा की भौगोलिक स्थिति →
बांसवाड़ा की मानचित्र के अनुसार स्थिति →
23°11 से 26°55 उत्तरी अक्षांश तथा
74°0 से 74°47 पूर्वी देशान्तवर
राजस्थान का सबसे दक्षिणी जिला।
राजस्थान का सबसे दक्षिण में स्थित बोरकुण्डा गाँव, कुशलगढ़ तहसील में है।
कर्क रेखा बाँसवाड़ा के कुशलगढ़ के बीच से होकर गुजरती है।
कर्क रेखा की लम्बाई राजस्थान में लगभग 26 किमी. है।
बाँसवाड़ा की सीमा मध्यप्रदेश व गुजरात दो राज्यों को स्पर्श करती है।
बांसवाड़ा के उपनाम → आदिवासियों का देश,
सौ द्वीपों का शहर,
बागड़ प्रदेशबांसवाड़ा का कुल क्षेत्रफल → लगभग 5037 वर्गकिलोमीटर
नगरीय क्षेत्रफल → 22 वर्गकिलोमीटर
ग्रामीण क्षेत्रफल → 5015 वर्गकिलोमीटर
बांसवाड़ा में विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 5 हैं।
जो निम्न है –
1. घाटोल 2. गढ़ी
3. बांसवाड़ा 4. बागीदोरा
5. कुशलगढ़
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार बांसवाड़ा की
जनसंख्या के आंकड़े →
कुल जनसंख्या—17,97,485
पुरुष—9,07,754
स्त्री—8,89,731 दशकीय वृद्धि दर—26.5%
लिंगानुपात—980 जनसंख्या घनत्व—397
साक्षरता दर—56.3% पुरुष साक्षरता—69.5%
महिला साक्षरता—43.1%
बांसवाड़ा में कुल पशुधन –
13,95,418 (LIVESTOCK CENSUS 2012)