डूंगरपुर के प्रसिद्ध व्यक्तित्व →Famous Personalities of Dungarpur
भोगीलाल पाण्ड्या—
‘वागड़ के गाँधी’ के नाम से प्रसिद्ध इनका जन्म 13 नवम्बर, 1904 को डूंगरपुर के सीमलवाड़ा गांव में हुआ। इन्होंने‘वागड़ सेवा मंदिर’ व डूँगरपुर प्रजामण्डल (1944 में) की स्थापना की।
डॉ. नगेन्द्र सिंह—
जन्म 18 मार्च 1914 में।
अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय, हेग में दो बार न्यायाधीश रहे। नगेन्द्र सिंह ने ‘द थ्योरी ऑफ फोर्स हिन्दू पॉलिटी’ पुस्तक की रचना की।
भारत सरकार ने 1973 में इन्हें ”पद्म विभूषण” से सम्मानित किया।
महारावल लक्ष्मण सिंह—
राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके लक्ष्मण सिंह एक शिकारी के रूप में इनका नाम ”गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड्” रिकार्ड में दर्ज है, अफ्रीका के जंगलों में शिकार के लिये जाते थे।
लक्ष्मरण सिंह राजपूताना क्रिकेट टीम के कप्ताकन भी रहें थे।
गवरी बाई—
कृष्ण भक्ति के कारण इन्हें ”वागड़ की मीरां” कहा जाता है।इनका जन्म डूँगरपुर के ब्राह्मण (नागर) परिवार में हुआ इन्होंने कीर्तनमाला नामक ग्रन्थ की रचना की। डूंगरपुर के महारावल शिवसिंह ने गवरी बाई के प्रति श्रद्धास्वरूप ”बालमुकुंद मंदिर” बनवाया।
कालीबाई—
रास्तापाल (डूँगरपुर) में अपने गुरु नानाभाई खांट को बचाने हेतु 12 वर्ष की आयु में जून, 1947 को शहीद हो गई।
इनका दाह संस्कार सुरपुर ग्राम (गैब सागर बांध के पास) में किया।
राजस्थान की सबसे कम उम्र की महिला स्वतन्त्रता सेनानी-काली बाई ही थी।
रास्ताेपाल ग्राम की पाठशाला में हुये हत्यारकांड में पाठशाला संरक्षक नानाभाई खांट, अध्या।पक सेंगाभाई तथा भील बालिका काली बाई शहीद हो गए।
इनका दाह संस्कार सुरपुर ग्राम (गैब सागर बांध के पास) में किया।
राजस्थान की सबसे कम उम्र की महिला स्वतन्त्रता सेनानी-काली बाई ही थी।
रास्ताेपाल ग्राम की पाठशाला में हुये हत्यारकांड में पाठशाला संरक्षक नानाभाई खांट, अध्या।पक सेंगाभाई तथा भील बालिका काली बाई शहीद हो गए।