बीकानेर के ऐेतिहासिक एवं दर्शनीय स्थल →Historical and sightseeing places of Bikaner


बीकानेर शहर—

प्राचीन समय में इसे राती घाटी के नाम से जाना जाता था। विक्रम संवत् 1542 को राव बीका ने राती घाटी के एक टीले पर अपने लिए एक छोटा सा किला बनवाया था,

जहाँ वर्तमान में लक्ष्मीनाथ जी के मन्दिर के सामने गणेश मन्दिर है।

इस किले को बीका की टेकरी कहा जाता था।

लालगढ़ पैलेस—


महाराजा गंगासिंह ने अपने पिता लालसिंह की स्मृति में बनवाया।

अनूप महल—


अनूपसिंह द्वारा निर्मित इस इमारत में बीकानेर के शासकों का राजतिलक होता था तथा इस इमारत में सोने की कलम से काम किया हुआ है।

गजमन्दिर महल तथा फूलमहल—


शीशे की बारीक कटाई व फूल पत्तियों के सजीव चित्रांकन के लिए प्रसिद्ध है।

सूरसागर—


इसका निर्माण सूरसिंह ने करवाया। इस झील का पुनर्निर्माण वसुन्धरा राजे ने करवाया तथा इसमें 15.8.2008 को नौकायन का उद्घाटन किया। इस दुर्ग में घण्टाघर, हैराम्ब गणपति (सिंह सवार गणेश), हर मन्दिर,

33 करोड़ देवी देवताओं की मूर्तियां तथा सरस्वती प्रतिमा आदि स्थित है।

कोलायत मेला—

सांख्य दर्शन के प्रणेता की तपोभूमि, यहाँ पर कपिल मुनि का मन्दिर है यहाँ कार्तिक माह में पाँच दिवसीय मेला भरता है। (कार्तिक पूर्णिमा)

करणी माता का मन्दिर देशनोक—

चूहों वाली देवी।

इसका मेला चैत्र व आश्विन के नवरात्रों में लगता है। करणी माँ का बचपन का नाम रिद्धिबाई था। बीकानेर के राठौड़ों व चारणों की कुल देवी। सफेद चूहे को काबा कहा जाता है। माता के मन्दिर परिसर में सावन-भादौं कड़ाईयाँ है।

(नोट—सम्पूर्ण सफेद चूहों वाला माता का मन्दिर जोधपुर में है।) करणी माता का पुजारी-बीठू।

लोकदेवता बिग्गाजी—

बिग्गाजी जाट ने मुस्लिम लुटेरों से गायें छुड़ाते हुए अपने प्राणों का बलिदान किया।

प्रतिवर्ष 14 अक्टूबर को बिग्गा गाँव (बीकानेर) में इनका मेला लगता है।

मुकाम—

विश्नोई सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ मुकाम-तालवा (नोखा-बीकानेर) में है।

यहाँ जाम्भोजी ने 1526 ई. में समाधि ली थी। आश्विन व फाल्गुन अमावस्या को यहाँ पर मेला लगता है। लालासर (बीकानेर) जाम्भोजी का निर्वाण स्थल है।

सिंहथल—

रामस्नेही सम्प्रदाय की पीठ,

संस्थापक हरिदास जी।

भांडाशाह के जैन मन्दिर—


यह मन्दिर 5वें तीर्थंकर सुमितनाथ को समर्पित है। इसे त्रिलोकदीपक प्रसाद के नाम से भी जाना जाता है।

नोट—इस मंदिर के प्रथम मंजिल के निर्माण में पानी के स्थान पर घी का प्रयोग किया गया था इसलिए इसे घी वाला मन्दिर भी कहते हैं।

देवकुण्ड –

बीकानेर राजघराने का निजी शमसान घाट देवकुण्ड है, यहाँ पर महाराजा सूरजसिंह की सफेद संगमरमर की छतरी दर्शनीय है।

कतरियासर—

जसनाथी सम्प्रदाय की प्रधानपीठ।

इस सम्प्रदाय का अग्नि नृत्य (एक मात्र धार्मिक लोकनृत्य) प्रसिद्ध है।

अग्नि-नृत्य

पुरुषों द्वारा नंगे पावों से अंगारों के ढ़ेर (धूणा) पर किया जाता है। इस नृत्य के दौरान फतेह-फतेह का नारा बोला जाता है। इस नृत्य का उद्गम कतरियासर से हुआ तथा यह नृत्य सर्वाधिक अश्विन शुक्ल सप्तमी को होता है। इस नृत्य का नृत्यकार नाचणिया कहलाता है। इस सम्प्रदाय का संत सिद्ध कहलाता है।

बीकानेर की हवेलियाँ—

रामपुरिया,

एवं बच्छावतों की हवेलियाँ।

गंगा निवास पब्लिक पार्क—

इसका उद्घाटन वायसराय लार्ड हार्डिंग्स ने सन् 1915 में करवाया।

गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय—


5 नवम्बर 1937 को गंगा सिंह की स्वर्ण जयंती पर स्थापना हुई।

इसकी स्थापना लार्ड लिनलिथगो ने की, इसे बीकानेर संग्रहालय भी कहते हैं।

करणी संग्रहालय—जूनागढ़ किले में।

सार्दुल संग्रहालय—लालगढ़ महल में।