भीलवाड़ा के महत्त्वपूर्ण तथ्य →Important facts of Bhilwara

  • पूर्ण उत्तरदायी शासन स्थापित करने वाली पहली रियासत शाहपुरा थी, जिसने 14 अगस्त, 1947 को उत्तरदायी शासन की स्थापना की।

  • ऊपरमाल—भैंसरोगढ़ (चित्तौडगढ़) से लेकर बिजौलिया (भीलवाड़ा) तक का पठारी भाग ऊपरमाल कहलाता है।

  • भीलवाड़ा क्षेत्र में स्थित ‘जहाजपुर’ को महाभारत काल में खेराड़-प्रदेश कहा जाता था।
  • बागोर के निकट ‘कोठारी नदी’ के तट पर बसे गांव पुरातत्वn की दृष्टि से समृद्ध है।
  • कम्प्यूटर एडेड डिजाइन सेंटर भीलवाड़ा में है।
  • वनस्पति घी (1974 में स्थापित) फैक्ट्री भीलवाड़ा में है।
  • पहली महिला तकनीकी अधिकारी भीलवाड़ा की फ्लाइट लेफ्टीनेन्ट मोनिका बनी।
  • भीलवाड़ा जिले को टाउन ऑफ एक्सपोर्ट एक्सीलेंस का दर्जा मिला है।
  • बांका—राजस्थान की प्रथम अलंकृत गुफा मिली।
  • ओझियाणा—ताम्रयुगीन अवशेष, भारत में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य यहीं से प्राप्त हुए हैं।
  • बनेड़ा दुर्ग, माण्डलगढ़ दुर्ग (त्रिवेणी संगम मर) भीलवाड़ा में है।
  • गूदड़ सम्प्रदाय की प्रधान पीठ दांतड़ा (भीलवाड़ा) में है।
  • धनोप माता का मंदिर शाहपुरा, भीलवाड़ा में है।
  • राजस्थान धरोहर संरक्षण की ओर से ‘टेम्पल विलेज’ के रूप में विकसित होने वाला गाँव-बघेरा गाँव भीलवाड़ा में है।
  • नाहर नृत्य माण्डलगढ़ का प्रसिद्ध जबकि स्वांग शाहपुरा का प्रसिद्ध है।
  • ईंट उद्योग में भीलवाड़ा सर्वाधिक विकसित जिला है। यहाँ पर अभ्रक की ईंटें बनाई जाती है तथा राजस्थान में अभ्रक मण्डी भी यहीं है।
  • ‘माच ख्याल’ के पितामह भीलवाड़ा निवासी बगसु लाल खमेसरा को कहा जाता है।
  • हमीरगढ़ → चित्तौड़गढ़ की सीमा पर राष्ट्री य राजमार्ग 8 पर स्थित, प्राचीन नाम बाकरोल।
  • नवीं और बारहवीं शताब्दीर के प्राचीन मंदिरों से भीलवाड़ा जिला परिपूर्ण है। बिजोलिया, तिरस्वां एवं माण्डलगढ़ मध्यचकालीन मन्दिर, कला एवं स्थापत्य के अनूठे नमूने हैं।
  • मांडल (भीलवाड़ा) में होली के तेरह दिन पश्चात् रंग तेरस पर आयोजित नाहर नृत्य के सम्बंध में कहा जाता है कि इसकी शुरुआत शाहजहाँ के शासनकाल में हुई।
  • सूलिया—12 दिसम्बर, 2006
  • को चाँवड़ा माता के मंदिर में दलितों ने सामाजिक कार्यकर्ता भोपे हजारी के नेतृत्व में प्रवेश किया। इसमें अरूणा राय (सूचना अधिकार दिलाने वाली) ने भी हिस्सा लिया।
  • केन्द्र सरकार ने 26 फरवरी, 2009 को कपड़ा निर्यातक शहर का दर्जा दिया।
  • भीलवाड़ा का सूती वस्त्र उद्योग प्रमुख है। यहाँ पर मेवाड़ टैक्सटाइल्स मिल लिमिटेड की स्थापना 1938 में हुई।
  • 1965 में गुलाबपुरा (भीलवाड़ा) ‘राजस्थान सहकारी कताई मिल एवं 1981 में गंगापुर (भीलवाड़ा) में ‘गंगापुर सहकारी कताई मिल’ की स्थापना की।
  • नांदणे (घाघरे की छपी फड़)-भीलवाड़ा।