डूँगरपुर जिले के महत्त्वपूर्ण तथ्य →Important facts of Dungarpur district

डूँगरपुर को पहाड़ों की नगरी कहा जाता है। 
राजस्थान निर्माण के समय यह राजस्थान का सबसे-छोटा जिला था।
वागड़ की राजधानी-बड़ौदा (प्राचीन काल)। बड़ौदा गांव में सम्वत् 1349 का महाराजा वीरसिंह देव के समय का एक शिलालेख लगा हुआ है।

डूँगरपुर को राष्ट्रीय बागवानी मिशन में शामिल किया गया है।

डूँगरपुर कलेक्ट्रेट परिसर में राज्य में पहली बार ‘ड्रेस कोड’ शुरू किया गया है।

बरबूदानियाँ—
यहाँ देश का तीसरा एवम् जनजाति क्षेत्रों में देश का प्रथम महिला सहकारी मिनी बैंक स्थापित किया।

वनों को बढ़ावा देने के लिए 1986 में राजीव गाँधी ने रूख भायला कार्यक्रम की शुरूआत डूँगरपुर से की। रूख भायला का अर्थ-वृक्ष मित्र होता है।

भारत सरकार ने सर्वें में 150 पिछड़े जिलों की पहचान की गई, जिसमें डूँगरपुर भी शामिल है।

रमकड़ा उद्योग –
गलियाकोट, डूँगरपुर में स्थित इन उद्योगों में सोप स्टोeन के कलात्म”क खिलौनों का निर्माण किया जाता है।

महुआ का पेड़ –
आदिवासियों के लिए वरदान है, इस पेड़ से महुड़ी शराब बनाते हैं।

बाँसवाड़ा-डूँगरपुर-रतलाम –
रेलवे लाइन का शुभारम्भ 3 जून, 2011 को सोनिया गाँधी ने डूँगरपुर में किया।

राज्य का प्रथम पूर्ण आदिवासी साक्षर जिला-डूँगरपुर।

राज्य सरकार ने कालीबाई के सम्मान में काली बाई महिला साक्षरता उन्नयन पुरस्कार चालू कर रखा है।

राजस्थान में डामोर जनजाति सर्वाधिक सीमलवाड़ा (डूँगरपुर) में निवास करती है।


यह जनजाति एक मात्र ऐसी जनजाति है जो वनों पर आश्रित नहीं है।