जूनागढ़ दुर्ग—Junagarh Fort Bikaner


उपनाम—जमीन का जेवर/बीकाजी की टेकरी/राती घाटी का दुर्ग, इस चतुष्कोणीय स्थल व धान्वन दुर्ग की नींव राव बीका ने 1488 ई. में अक्षय तृतीया के दिन करणी माता (रिद्धि बाई) के आशीर्वाद से रातीघाटी में रखी थी।

इस दुर्ग में राजस्थान में पहली बार लिफ्ट लगी थी। इस दुर्ग में हिन्दु तथा मुस्लिम शैली का समन्वय है, इस दुर्ग का पुनर्निर्माण रायसिंह ने करवाया था। जूनागढ़ के बारे में कहा जाता है कि ”दीवारों के कान भी होते हैं लेकिन जूनागढ़ की तो दीवारें भी बोलती हैं।”

जूनागढ़ दुर्ग के प्रवेश द्वार—


सूरजपोल—इस प्रवेश द्वार पर रायसिंह प्रशस्ति के दोनों ओर जयमल व फता की मूर्तियां लगी हुई है।

कर्णपोल—पूर्वीद्वार,

चांदपोल-पश्चिमी द्वार।

जूनागढ़ दुर्ग के दर्शनीय स्थल—


छत्र निवास—


यह सुन्दर लकड़ी की छत तथा कृष्ण की रास लीलाओं के लिए प्रसिद्ध है