भीलवाड़ा के दर्शनीय स्थल –places to visit in bhilwara
सवाई भोज मन्दिर—
गुर्जरों के लोक देवता के रूप में प्रसिद्ध देवनारायण जी का मन्दिर आसीन्द में है। देवनारायण जी के मन्दिर में मूर्ति के स्थान पर ईंट की पूजा नीम की पत्तियों द्वारा की जाती है। यहाँ पर भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को विशाल मेला भरता है। देवनारायण जी फड़ पर 1992 में 5 रु. का डाकटिकट जारी है।यह राजस्थान की सबसे प्राचीन, सबसे लम्बी तथा सबसे छोटी फड़, देवनारायण जी की है। इसको बांचने के लिए जन्तर वाद्य यन्त्र का प्रयोग होता है।
शाहपुरा—रामस्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक रामचरण जी का निर्वाण स्थल।
यहाँ पर चैत्र कृष्ण 2 से 5 तक फूलडोल उत्सव मनाया जाता है।
बागौर—कोठारी नदी के तट पर, यहाँ पर ‘महासतियों का टीला’ है।
भारत की सबसे सम्पन्न पाषाण कालीन सभ्यता तथा यहाँ से पशुपालन के अवशेष मिले हैं।
बिजौलिया—किसान आन्दोलन का जन्म यहीं से हुआ। यहाँ पर प्रसिद्ध मंदाकिनी मंदिर है। हाल ही में यहाँ से प्राग्ऐतिहासिक काल के शैल चित्र प्राप्त हुए हैं।
तिलस्वाँ महादेव मन्दिर—
माण्डलगढ़ के समीप इस स्थल पर शिवरात्री को मेला भरता है।
तिलस्वां के जलकुण्ड चर्म रोग निवारण के लिए प्रसिद्ध है।
मांडलगढ़—जगन्नाथ कच्छवाहा की 32 खम्भों की छतरी स्थित है। महाराणा सांगा की छतरी भी यहीं है।
बिजौलिया शिलालेख—
1170 ई. में प्राप्त इस शिलालेख में चौहानों को वत्स गौत्रीय ब्राह्मण बताया गया है।
इसकी स्थापना ‘जैन श्रावक लोलाक’ ने की।