सरिस्का वन्य जीव अभयारण—Sariska Wildlife Sanctuary
सरिस्का वन्य जीव अभयारण की स्थापना
सन् 1955 में हुई।
1978-79 में इसे ‘बाघ परियोजना’ (राज्य की दूसरी)
के अन्तर्गत शामिल किया गया।
उपनाम—बाघों की मांद।
सरिस्का वन्य जीव अभयारण हरे कबूतर के लिए प्रसिद्ध है।
सरिस्का अभयारण्य 492 वर्ग किमी. पर विस्तृत अलवर से 35 किमी. दूर जयपुर – दिल्ली मार्ग पर स्थित है।