बारां के दर्शनीय पर्यटन एवं तीर्थ स्थल –Sightseeing and Pilgrimage Places of Baran
सीताबाड़ी तीर्थ स्थल—
केलवाड़ा के नजदीक सीताबाड़ी सहरिया जनजाति का धार्मिक स्थल है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार सीता ने अपना निर्वासन काल वाल्मीकि के साथ यहीं पर गुजारा था।
सीताबाड़ी लवकुश की जन्म स्थली के रूप में विख्यात है।
यहाँ पर ज्येष्ठ की अमावस्या को विशाल मेला भरता है जिसे सहरिया जनजाति का कुम्भ, हाड़ौती का कुम्भ कहते हैं।
सीताबाड़ी के कुण्ड में अस्थियों के विसर्जन का संस्कार धारी संस्कार कहलाता है।
ब्राह्मणी माता का मन्दिर—
सोरसन ग्राम के समीप ब्रह्माणी माता का प्राचीन मंदिर है। सम्पूर्ण विश्व का एकमात्र मन्दिर जहाँ देवी की पीठ की पूजा की जाती है।
यहाँ माघ शुक्ल सप्तमी को गधों का मेला भरता है। यहाँ पर देवी के अखण्ड ज्योति जलती है।
भण्डदेवरा—रामगढ़ के शिव मन्दिर पर उत्कीर्ण मिथुन मूर्तियों के कारण ही इसका नाम भण्डदेवरा पड़ा।
खजुराहो शैली पर आधारित यहाँ पर 108 मंदिरों का समूह है।
इसे राजस्थान का ‘मिनी खजुराहो’ कहते हैं।
लक्ष्मीनाथ/लक्ष्मीिनारायण मंदिर—
मांगरोल तहसील के श्रीनाथ गाँव का लक्ष्मीनाथ मंदिर पुरातात्त्विक महत्त्व की दृष्टि से बेजोड़ है। मंदिर के तोरणद्वार पर कलात्मक हाथी बने हुए हैं। लक्ष्मीनाथ जी के मंदिर को तेजी का मंदिर भी कहते हैं।
शाहबाद दुर्ग—
इस गिरी दुर्ग का निर्माण मुकुट मणिदेव ने भामती पहाड़ी पर करवाया।
इस दुर्ग में ‘कुंडा खोह’ झरना (चश्मा) है। इस दुर्ग में राज्य की सबसे बड़ी मस्जिद है। इसमें 18 तोपें हैं,
जिनमें सबसे बड़ी तोप नवलखा बाण तोप (19 फीट ) है।
अटरू—
अटरू में फूलदेवरा का मन्दिर(मामा-भान्जा)
स्थित है।
यहाँ पर धनुष
लीला का तीन दिवसीय लोकोत्सव आयोजित किया जाता है। यह एक प्रसिद्ध शिवालय है।
प्यारे राम जी का मन्दिर—
यहाँ रामानन्दी सम्प्रदाय के अन्तर्गत गुदड़ी पंथ की पीठ रही है।
कल्याण राय (श्रीजी) का मंदिर, बारां—
इसका निर्माण बूँदी की राजमाता राय कुंवर बाई ने करवाया।
मांगरोल—यहाँ पर शहीद पृथ्वीसिंह हाड़ा की स्मृति में
निर्मित बाबाजी का बाग दर्शनीय है।
मांगरोल की टेरीकोट साड़ी प्रसिद्ध है। यहाँ का 5 दिवसीय लोकोत्सव ढ़ाई कड़ी की रामलीला प्रसिद्ध है।
बारां के प्रसिद्ध मेले →
डोल मेला,
ब्राह्मणी माता का मेला,
पिपलोदा का क्रिस मेला आदि प्रसिद्ध है।
बारां में डोल तालाब के किनारे ‘डोल मेला’
भाद्रपद शुक्ल ग्यारस (जलझूलनी ग्यारस) को लगता है।