करणीमाता का मंदिर-देशनोक (बीकानेर)-Temple of Karnimata-Deshnok

करणीमाता का मंदिर राजस्थान राज्य के  बीकानेर नगर  से लगभग 30 किलोमीटर दूर जोधपुर रोड पर गाँव देशनोक की सीमा में स्थित है।
यह भी एक तीर्थ धाम है, 
लेकिन इसे चूहे वाले मंदिर के नाम से भी जाना जानता हैं।
            
करणी देवी साक्षात माँ जगदम्बा की अवतार थीं।
करणीमाता का मंदिर-देशनोक
करणीमाता का मंदिर-देशनोक

करणी देवी मंदिर का निर्माण 20वी शताब्दी में बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था। 
माता करणी बीकानेर राजघराने की कुलदेवी हैं। 
कहा जाता है कि माता करणी का जन्म एक चारण परिवार में हुआ था।
अब से लगभग साढ़े छह सौ वर्ष पूर्व जिस स्थान पर यह भव्य मंदिर है, वहाँ एक गुफा में रहकर माँ अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना किया करती थीं।
यह गुफा आज भी मंदिर परिसर में स्थित है।

माँ के ज्योर्तिलीन होने पर उनकी इच्छानुसार उनकी मूर्ति की इस गुफा में स्थापना की गई।
संगमरमर से बने मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है।
 वहाँ पर चूहों की धमाचौकड़ी देखती ही बनती है।
        
चूहों की धमाचौकड़ी
चूहों की धमाचौकड़ी

 चूहे पूरे मंदिर प्रांगण में मौजूद रहते हैं। 
वे श्रद्धालुओं के शरीर पर कूद-फांद करते हैं, लेकिन किसी को कोई नुक़सान नहीं पहुँचाते। 
चील, गिद्ध और दूसरे जानवरों से इन चूहों की रक्षा के लिए मंदिर में खुले स्थानों पर बारीक जाली लगी हुई है।
 इन चूहों की उपस्थिति की वजह से ही श्री करणी देवी का यह मंदिर चूहों वाले मंदिर के नाम से भी विख्यात है। ऐसी मान्यता है कि किसी श्रद्धालु को यदि यहाँ सफ़ेद चूहे के दर्शन होते हैं, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। 
सुबह पाँच बजे मंगला आरती और सायं सात बजे आरती के समय चूहों का जुलूस तो देखने लायक़ होता है।
चाँदी के किवाड़, सोने के छत्र और चूहों के प्रसाद के लिए यहाँ रखी चाँदी की बड़ी परात भी देखने लायक़ है।